Hanuman Bahuk PDF – श्री हनुमान बाहुक पाठ

Hanuman Bahuk PDF is free to download for all of our visitors. It is believed that at the beginning of Kaliyuga Tulasidas faced tremendous body pain and he wrote Shree Hanuman Bahuk and got relief.

So, you can chant Hanuman Bahuk to get relief from your life’s Pain. You can start chanting Hanuman Bahuk by reading the Hanuman Bahuk PDF alongside listening to the recorded song on YouTube.

The Best Day to Pray lord Hanuman is on Tuesday and Saturday, so start chanting Hanuman Bahuk on Tuesday.

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ऐसा माना जाता है की कलियुग के शुरुवात मे जब तुलसीदास जी को अत्यंत शारीरिक पीड़ा होने लागि तो उन्होंने हनुमान बहुक की रचना की, और उनके सारे दुख दर्द पीड़ा दूर हो गए।

आप भी अपने जीवन मे शारीरिक पीड़ा, कस्ट और दुख को दूर कर सकते है हनुमान बहुक का पाठ हर मंगलवार के दिन कर के।


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Hanuman Bahuk Lyrics in Hindi:

श्रीगणेशाय नमः
श्रीजानकीवल्लभो विजयते
श्रीमद्-गोस्वामी-तुलसीदास-कृत

सिंधु-तरन, सिय-सोच-हरन, रबि-बाल-बरन तनु ।
भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु ।।
गहन-दहन-निरदहन लंक निःसंक, बंक-भुव ।
जातुधान-बलवान-मान-मद-दवन पवनसुव ।।
कह तुलसिदास सेवत सुलभ सेवक हित सन्तत निकट ।
गुन-गनत, नमत, सुमिरत, जपत समन सकल-संकट-विकट ।।१।।

स्वर्न-सैल-संकास कोटि-रबि-तरुन-तेज-घन ।
उर बिसाल भुज-दंड चंड नख-बज्र बज्र-तन ।।
पिंग नयन, भृकुटी कराल रसना दसनानन ।
कपिस केस, करकस लँगूर, खल-दल बल भानन ।।
कह तुलसिदास बस जासु उर मारुतसुत मूरति बिकट ।
संताप पाप तेहि पुरुष पहिं सपनेहुँ नहिं आवत निकट ।।२।।

पंचमुख-छमुख-भृगु मुख्य भट असुर सुर, सर्व-सरि-समर समरत्थ सूरो ।
बाँकुरो बीर बिरुदैत बिरुदावली, बेद बंदी बदत पैजपूरो ।।
जासु गुनगाथ रघुनाथ कह, जासुबल, बिपुल-जल-भरित जग-जलधि झूरो ।
दुवन-दल-दमनको कौन तुलसीस है, पवन को पूत रजपूत रुरो ।।३।।

भानुसों पढ़न हनुमान गये भानु मन-अनुमानि सिसु-केलि कियो फेरफार सो ।
पाछिले पगनि गम गगन मगन-मन, क्रम को न भ्रम, कपि बालक बिहार सो ।।
कौतुक बिलोकि लोकपाल हरि हर बिधि, लोचननि चकाचौंधी चित्तनि खभार सो।
बल कैंधौं बीर-रस धीरज कै, साहस कै, तुलसी सरीर धरे सबनि को सार सो ।।४।।

भारत में पारथ के रथ केथू कपिराज, गाज्यो सुनि कुरुराज दल हल बल भो ।
कह्यो द्रोन भीषम समीर सुत महाबीर, बीर-रस-बारि-निधि जाको बल जल भो ।।
बानर सुभाय बाल केलि भूमि भानु लागि, फलँग फलाँग हूँतें घाटि नभतल भो ।
नाई-नाई माथ जोरि-जोरि हाथ जोधा जोहैं, हनुमान देखे जगजीवन को फल भो ।।५।।

गो-पद पयोधि करि होलिका ज्यों लाई लंक, निपट निसंक परपुर गलबल भो ।
द्रोन-सो पहार लियो ख्याल ही उखारि कर, कंदुक-ज्यों कपि खेल बेल कैसो फल भो ।।
संकट समाज असमंजस भो रामराज, काज जुग पूगनि को करतल पल भो ।
साहसी समत्थ तुलसी को नाह जाकी बाँह, लोकपाल पालन को फिर थिर थल भो ।।६।।

कमठ की पीठि जाके गोडनि की गाड़ैं मानो, नाप के भाजन भरि जल निधि जल भो ।
जातुधान-दावन परावन को दुर्ग भयो, महामीन बास तिमि तोमनि को थल भो ।।
कुम्भकरन-रावन पयोद-नाद-ईंधन को, तुलसी प्रताप जाको प्रबल अनल भो ।
भीषम कहत मेरे अनुमान हनुमान, सारिखो त्रिकाल न त्रिलोक महाबल भो ।।७।।

दूत रामराय को, सपूत पूत पौनको, तू अंजनी को नन्दन प्रताप भूरि भानु सो ।
सीय-सोच-समन, दुरित दोष दमन, सरन आये अवन, लखन प्रिय प्रान सो ।।
दसमुख दुसह दरिद्र दरिबे को भयो, प्रकट तिलोक ओक तुलसी निधान सो ।
ज्ञान गुनवान बलवान सेवा सावधान, साहेब सुजान उर आनु हनुमान सो ।।८।।

दवन-दुवन-दल भुवन-बिदित बल, बेद जस गावत बिबुध बंदीछोर को ।
पाप-ताप-तिमिर तुहिन-विघटन-पटु, सेवक-सरोरुह सुखद भानु भोर को ।।
लोक-परलोक तें बिसोक सपने न सोक, तुलसी के हिये है भरोसो एक ओर को ।
राम को दुलारो दास बामदेव को निवास, नाम कलि-कामतरु केसरी-किसोर को ।।९।।

महाबल-सीम महाभीम महाबान इत, महाबीर बिदित बरायो रघुबीर को ।
कुलिस-कठोर तनु जोरपरै रोर रन, करुना-कलित मन धारमिक धीर को ।।
दुर्जन को कालसो कराल पाल सज्जन को, सुमिरे हरनहार तुलसी की पीर को ।
सीय-सुख-दायक दुलारो रघुनायक को, सेवक सहायक है साहसी समीर को ।।१०।।

रचिबे को बिधि जैसे, पालिबे को हरि, हर मीच मारिबे को, ज्याईबे को सुधापान भो ।
धरिबे को धरनि, तरनि तम दलिबे को, सोखिबे कृसानु, पोषिबे को हिम-भानु भो ।।
खल-दुःख दोषिबे को, जन-परितोषिबे को, माँगिबो मलीनता को मोदक सुदान भो ।
आरत की आरति निवारिबे को तिहुँ पुर, तुलसी को साहेब हठीलो हनुमान भो ।।११।।

सेवक स्योकाई जानि जानकीस मानै कानि, सानुकूल सूलपानि नवै नाथ नाँक को ।
देवी देव दानव दयावने ह्वै जोरैं हाथ, बापुरे बराक कहा और राजा राँक को ।।
जागत सोवत बैठे बागत बिनोद मोद, ताके जो अनर्थ सो समर्थ एक आँक को ।
सब दिन रुरो परै पूरो जहाँ-तहाँ ताहि, जाके है भरोसो हिये हनुमान हाँक को ।।१२।।

सानुग सगौरि सानुकूल सूलपानि ताहि, लोकपाल सकल लखन राम जानकी ।
लोक परलोक को बिसोक सो तिलोक ताहि, तुलसी तमाइ कहा काहू बीर आनकी ।।
केसरी किसोर बन्दीछोर के नेवाजे सब, कीरति बिमल कपि करुनानिधान की ।
बालक-ज्यों पालिहैं कृपालु मुनि सिद्ध ताको, जाके हिये हुलसति हाँक हनुमान की ।।१३।।

करुनानिधान, बलबुद्धि के निधान मोद-महिमा निधान, गुन-ज्ञान के निधान हौ ।
बामदेव-रुप भूप राम के सनेही, नाम लेत-देत अर्थ धर्म काम निरबान हौ ।।
आपने प्रभाव सीताराम के सुभाव सील, लोक-बेद-बिधि के बिदूष हनुमान हौ ।
मन की बचन की करम की तिहूँ प्रकार, तुलसी तिहारो तुम साहेब सुजान हौ ।।१४।।

मन को अगम, तन सुगम किये कपीस, काज महाराज के समाज साज साजे हैं ।
देव-बंदी छोर रनरोर केसरी किसोर, जुग जुग जग तेरे बिरद बिराजे हैं ।
बीर बरजोर, घटि जोर तुलसी की ओर, सुनि सकुचाने साधु खल गन गाजे हैं ।
बिगरी सँवार अंजनी कुमार कीजे मोहिं, जैसे होत आये हनुमान के निवाजे हैं ।।१५।।

जान सिरोमनि हौ हनुमान सदा जन के मन बास तिहारो ।
ढ़ारो बिगारो मैं काको कहा केहि कारन खीझत हौं तो तिहारो ।।
साहेब सेवक नाते तो हातो कियो सो तहाँ तुलसी को न चारो ।
दोष सुनाये तें आगेहुँ को होशियार ह्वैं हों मन तौ हिय हारो ।।१६।।

तेरे थपे उथपै न महेस, थपै थिरको कपि जे घर घाले ।
तेरे निवाजे गरीब निवाज बिराजत बैरिन के उर साले ।।
संकट सोच सबै तुलसी लिये नाम फटै मकरी के से जाले ।
बूढ़ भये, बलि, मेरिहि बार, कि हारि परे बहुतै नत पाले ।।१७।।

सिंधु तरे, बड़े बीर दले खल, जारे हैं लंक से बंक मवा से ।
तैं रनि-केहरि केहरि के बिदले अरि-कुंजर छैल छवा से ।।
तोसों समत्थ सुसाहेब सेई सहै तुलसी दुख दोष दवा से ।
बानर बाज ! बढ़े खल-खेचर, लीजत क्यों न लपेटि लवा-से ।।१८।।

अच्छ-विमर्दन कानन-भानि दसानन आनन भा न निहारो ।
बारिदनाद अकंपन कुंभकरन्न-से कुंजर केहरि-बारो ।।
राम-प्रताप-हुतासन, कच्छ, बिपच्छ, समीर समीर-दुलारो ।
पाप-तें साप-तें ताप तिहूँ-तें सदा तुलसी कहँ सो रखवारो ।।१९।।

जानत जहान हनुमान को निवाज्यौ जन, मन अनुमानि बलि, बोल न बिसारिये ।
सेवा-जोग तुलसी कबहुँ कहा चूक परी, साहेब सुभाव कपि साहिबी सँभारिये ।।
अपराधी जानि कीजै सासति सहस भाँति, मोदक मरै जो ताहि माहुर न मारिये ।
साहसी समीर के दुलारे रघुबीर जू के, बाँह पीर महाबीर बेगि ही निवारिये ।।२०।।

बालक बिलोकि, बलि बारेतें आपनो कियो, दीनबन्धु दया कीन्हीं निरुपाधि न्यारिये ।
रावरो भरोसो तुलसी के, रावरोई बल, आस रावरीयै दास रावरो बिचारिये ।।
बड़ो बिकराल कलि, काको न बिहाल कियो, माथे पगु बलि को, निहारि सो निवारिये ।
केसरी किसोर, रनरोर, बरजोर बीर, बाँहुपीर राहुमातु ज्यौं पछारि मारिये ।।२१।।

उथपे थपनथिर थपे उथपनहार, केसरी कुमार बल आपनो सँभारिये ।
राम के गुलामनि को कामतरु रामदूत, मोसे दीन दूबरे को तकिया तिहारिये ।।
साहेब समर्थ तोसों तुलसी के माथे पर, सोऊ अपराध बिनु बीर, बाँधि मारिये ।
पोखरी बिसाल बाँहु, बलि, बारिचर पीर, मकरी ज्यौं पकरि कै बदन बिदारिये ।।२२।।

राम को सनेह, राम साहस लखन सिय, राम की भगति, सोच संकट निवारिये ।
मुद-मरकट रोग-बारिनिधि हेरि हारे, जीव-जामवंत को भरोसो तेरो भारिये ।।
कूदिये कृपाल तुलसी सुप्रेम-पब्बयतें, सुथल सुबेल भालू बैठि कै बिचारिये ।
महाबीर बाँकुरे बराकी बाँह-पीर क्यों न, लंकिनी ज्यों लात-घात ही मरोरि मारिये ।।२३।।

लोक-परलोकहुँ तिलोक न बिलोकियत, तोसे समरथ चष चारिहूँ निहारिये ।
कर्म, काल, लोकपाल, अग-जग जीवजाल, नाथ हाथ सब निज महिमा बिचारिये ।।
खास दास रावरो, निवास तेरो तासु उर, तुलसी सो देव दुखी देखियत भारिये ।
बात तरुमूल बाँहुसूल कपिकच्छु-बेलि, उपजी सकेलि कपिकेलि ही उखारिये ।।२४।।

करम-कराल-कंस भूमिपाल के भरोसे, बकी बकभगिनी काहू तें कहा डरैगी ।
बड़ी बिकराल बाल घातिनी न जात कहि, बाँहूबल बालक छबीले छोटे छरैगी ।।
आई है बनाइ बेष आप ही बिचारि देख, पाप जाय सबको गुनी के पाले परैगी ।
पूतना पिसाचिनी ज्यौं कपिकान्ह तुलसी की, बाँहपीर महाबीर तेरे मारे मरैगी ।।२५।।

भालकी कि कालकी कि रोष की त्रिदोष की है, बेदन बिषम पाप ताप छल छाँह की ।
करमन कूट की कि जन्त्र मन्त्र बूट की, पराहि जाहि पापिनी मलीन मन माँह की ।।
पैहहि सजाय, नत कहत बजाय तोहि, बाबरी न होहि बानि जानि कपि नाँह की ।
आन हनुमान की दुहाई बलवान की, सपथ महाबीर की जो रहै पीर बाँह की ।।२६।।

सिंहिका सँहारि बल, सुरसा सुधारि छल, लंकिनी पछारि मारि बाटिका उजारी है ।
लंक परजारि मकरी बिदारि बारबार, जातुधान धारि धूरिधानी करि डारी है ।।
तोरि जमकातरि मंदोदरी कढ़ोरि आनी, रावन की रानी मेघनाद महँतारी है ।
भीर बाँह पीर की निपट राखी महाबीर, कौन के सकोच तुलसी के सोच भारी है ।।२७।।

तेरो बालि केलि बीर सुनि सहमत धीर, भूलत सरीर सुधि सक्र-रबि-राहु की ।
तेरी बाँह बसत बिसोक लोकपाल सब, तेरो नाम लेत रहै आरति न काहु की ।।
साम दान भेद बिधि बेदहू लबेद सिधि, हाथ कपिनाथ ही के चोटी चोर साहु की ।
आलस अनख परिहास कै सिखावन है, एते दिन रही पीर तुलसी के बाहु की ।।२८।।

टूकनि को घर-घर डोलत कँगाल बोलि, बाल ज्यों कृपाल नतपाल पालि पोसो है ।
कीन्ही है सँभार सार अँजनी कुमार बीर, आपनो बिसारि हैं न मेरेहू भरोसो है ।।
इतनो परेखो सब भाँति समरथ आजु, कपिराज साँची कहौं को तिलोक तोसो है ।
सासति सहत दास कीजे पेखि परिहास, चीरी को मरन खेल बालकनि को सो है ।।२९।।

आपने ही पाप तें त्रिपात तें कि साप तें, बढ़ी है बाँह बेदन कही न सहि जाति है ।
औषध अनेक जन्त्र मन्त्र टोटकादि किये, बादि भये देवता मनाये अधिकाति है ।।
करतार, भरतार, हरतार, कर्म काल, को है जगजाल जो न मानत इताति है ।
चेरो तेरो तुलसी तू मेरो कह्यो राम दूत, ढील तेरी बीर मोहि पीर तें पिराति है ।।३०।।

दूत राम राय को, सपूत पूत बाय को, समत्व हाथ पाय को सहाय असहाय को ।
बाँकी बिरदावली बिदित बेद गाइयत, रावन सो भट भयो मुठिका के घाय को ।।
एते बड़े साहेब समर्थ को निवाजो आज, सीदत सुसेवक बचन मन काय को ।
थोरी बाँह पीर की बड़ी गलानि तुलसी को, कौन पाप कोप, लोप प्रकट प्रभाय को ।।३१।।

देवी देव दनुज मनुज मुनि सिद्ध नाग, छोटे बड़े जीव जेते चेतन अचेत हैं ।
पूतना पिसाची जातुधानी जातुधान बाम, राम दूत की रजाइ माथे मानि लेत हैं ।।
घोर जन्त्र मन्त्र कूट कपट कुरोग जोग, हनुमान आन सुनि छाड़त निकेत हैं ।
क्रोध कीजे कर्म को प्रबोध कीजे तुलसी को, सोध कीजे तिनको जो दोष दुख देत हैं ।।३२।।

तेरे बल बानर जिताये रन रावन सों, तेरे घाले जातुधान भये घर-घर के ।
तेरे बल रामराज किये सब सुरकाज, सकल समाज साज साजे रघुबर के ।।
तेरो गुनगान सुनि गीरबान पुलकत, सजल बिलोचन बिरंचि हरि हर के ।
तुलसी के माथे पर हाथ फेरो कीसनाथ, देखिये न दास दुखी तोसो कनिगर के ।।३३।।

पालो तेरे टूक को परेहू चूक मूकिये न, कूर कौड़ी दूको हौं आपनी ओर हेरिये ।
भोरानाथ भोरे ही सरोष होत थोरे दोष, पोषि तोषि थापि आपनी न अवडेरिये ।।
अँबु तू हौं अँबुचर, अँबु तू हौं डिंभ सो न, बूझिये बिलंब अवलंब मेरे तेरिये ।
बालक बिकल जानि पाहि प्रेम पहिचानि, तुलसी की बाँह पर लामी लूम फेरिये ।।३४।।

घेरि लियो रोगनि, कुजोगनि, कुलोगनि ज्यौं, बासर जलद घन घटा धुकि धाई है ।
बरसत बारि पीर जारिये जवासे जस, रोष बिनु दोष धूम-मूल मलिनाई है ।।
करुनानिधान हनुमान महा बलवान, हेरि हँसि हाँकि फूँकि फौजैं ते उड़ाई है ।
खाये हुतो तुलसी कुरोग राढ़ राकसनि, केसरी किसोर राखे बीर बरिआई है ।।३५।।

राम गुलाम तु ही हनुमान गोसाँई सुसाँई सदा अनुकूलो ।
पाल्यो हौं बाल ज्यों आखर दू पितु मातु सों मंगल मोद समूलो ।।
बाँह की बेदन बाँह पगार पुकारत आरत आनँद भूलो ।
श्री रघुबीर निवारिये पीर रहौं दरबार परो लटि लूलो ।।३६।।

काल की करालता करम कठिनाई कीधौं, पाप के प्रभाव की सुभाय बाय बावरे ।
बेदन कुभाँति सो सही न जाति राति दिन, सोई बाँह गही जो गही समीर डाबरे ।।
लायो तरु तुलसी तिहारो सो निहारि बारि, सींचिये मलीन भो तयो है तिहुँ तावरे ।
भूतनि की आपनी पराये की कृपा निधान, जानियत सबही की रीति राम रावरे ।।३७।।

पाँय पीर पेट पीर बाँह पीर मुँह पीर, जरजर सकल पीर मई है ।
देव भूत पितर करम खल काल ग्रह, मोहि पर दवरि दमानक सी दई है ।।
हौं तो बिनु मोल के बिकानो बलि बारेही तें, ओट राम नाम की ललाट लिखि लई है ।
कुँभज के किंकर बिकल बूढ़े गोखुरनि, हाय राम राय ऐसी हाल कहूँ भई है ।।३८।।

बाहुक-सुबाहु नीच लीचर-मरीच मिलि, मुँहपीर केतुजा कुरोग जातुधान हैं ।
राम नाम जगजाप कियो चहों सानुराग, काल कैसे दूत भूत कहा मेरे मान हैं ।।
सुमिरे सहाय राम लखन आखर दोऊ, जिनके समूह साके जागत जहान हैं ।
तुलसी सँभारि ताड़का सँहारि भारि भट, बेधे बरगद से बनाइ बानवान हैं ।।३९।।

बालपने सूधे मन राम सनमुख भयो, राम नाम लेत माँगि खात टूकटाक हौं ।
परयो लोक-रीति में पुनीत प्रीति राम राय, मोह बस बैठो तोरि तरकि तराक हौं ।।
खोटे-खोटे आचरन आचरत अपनायो, अंजनी कुमार सोध्यो रामपानि पाक हौं ।
तुलसी गुसाँई भयो भोंडे दिन भूल गयो, ताको फल पावत निदान परिपाक हौं ।।४०।।

असन-बसन-हीन बिषम-बिषाद-लीन, देखि दीन दूबरो करै न हाय हाय को ।
तुलसी अनाथ सो सनाथ रघुनाथ कियो, दियो फल सील सिंधु आपने सुभाय को ।।
नीच यहि बीच पति पाइ भरु हाईगो, बिहाइ प्रभु भजन बचन मन काय को ।
ता तें तनु पेषियत घोर बरतोर मिस, फूटि फूटि निकसत लोन राम राय को ।।४१।।

जीओं जग जानकी जीवन को कहाइ जन, मरिबे को बारानसी बारि सुरसरि को ।
तुलसी के दुहूँ हाथ मोदक हैं ऐसे ठाँउ, जाके जिये मुये सोच करिहैं न लरि को ।।
मोको झूटो साँचो लोग राम को कहत सब, मेरे मन मान है न हर को न हरि को ।
भारी पीर दुसह सरीर तें बिहाल होत, सोऊ रघुबीर बिनु सकै दूर करि को ।।४२।।

सीतापति साहेब सहाय हनुमान नित, हित उपदेश को महेस मानो गुरु कै ।
मानस बचन काय सरन तिहारे पाँय, तुम्हरे भरोसे सुर मैं न जाने सुर कै ।।
ब्याधि भूत जनित उपाधि काहु खल की, समाधि कीजे तुलसी को जानि जन फुर कै ।
कपिनाथ रघुनाथ भोलानाथ भूतनाथ, रोग सिंधु क्यों न डारियत गाय खुर कै ।।४३।।

कहों हनुमान सों सुजान राम राय सों, कृपानिधान संकर सों सावधान सुनिये ।
हरष विषाद राग रोष गुन दोष मई, बिरची बिरञ्ची सब देखियत दुनिये ।।
माया जीव काल के करम के सुभाय के, करैया राम बेद कहैं साँची मन गुनिये ।
तुम्ह तें कहा न होय हा हा सो बुझैये मोहि, हौं हूँ रहों मौनही बयो सो जानि लुनिये ।।४४।।

Hanuman Bahuk Explain and Pronounced Video:

Hanuman Bahuk Lyrics in Hinglish:

Shri Ganeshay Namah:
Shri Janaki Vallabho Vijayate
Shrimad Goswami Tulsidas Krit

Sindhu-Taran, Siya-Soch-Haran, Rabi-Bal-Baran Tanu ।
Bhuj Bisaal, Moorti Karaal Kaalhuko Kaal Janu ।।
Gahan-Dahan-Niradahan Lank Nihsank, Bank-Bhuv ।
Jaatudhaan-Balvaan-Maan-Mad-Davan Pavanasuv ।।
Kah Tulsidas Sevat Sulabh Sevak Hit Santat Nikat ।
Gun-Ganat, Namat, Sumirat, Japat Saman Sakal-Sankat-Vikat ।। 1 ।।

Swarn-Sail-Sankaas Koti-Rabi-Tarun-Tej-Ghan ।
Ur Bisaal Bhuj-Dand Chand Nakh-Bajr Bajr-Tan ।।
Ping Nayan, Bhrukuti Karaal Rasnaa Dasanaanan ।
Kapis Kes, Karakas Langoor, Khal-Dal Bal Bhaanan ।।
Kah Tulsidas Bas Jaasu Ur Maarutasut Moorti Bikat ।
Santaap Paap Tehi Purush Pahin Sapnehu Naheen Aavat Nikat ।। 2 ।।

Panchmukh-Chamukh-Bhrigu Mukhy Bhat Asur Sur, Sarv-Sari-Samar Samarath Suro ।
Baankuro Bir Birudait Birudaavali, Bed Bandi Badat Pajpuro ।।
Jaasu Gunagaath Ragunath Kah, Jaasubal, Bipul-Jal-Bharit Jag-Jaladhi Jhooro ।
Duvan-Dal-Damanku Kaun Tulsis Hai, Pavan Ko Poot Rajpoot Ruro ।। 3 ।।

Bhanuson Padhan Hanuman Gaye Bhanu Man-Anumani Sisu-Keli Kiyo Pheraphaar So ।
Paachile Pagan Gam Gagan Magna-Man, Kram Ko Na Bhram, Kapi Baalak Bihar So ।।
Kautuk Biloki Lokpaal Hari Har Bidhi, Lochanani Chakaachoundhi Chittani Khbhaar So ।
Bal Kaindhaun Bir-Ras Dheeraj Kai, Saahas Kai, Tulsii Shareer Dhare Sabni Ko Saar So ।। 4 ।।

Bharat Mein Parth Ke Rath Kethu Kapiraj, Gaajyo Suni Kururaaj Dal Hal Bal Bho ।
Kahyo Dron Bheesham Sameer Sut Mahaabir, Bir-Ras-Baari-Nidhi Jaako Bal Jal Bho ।।
Baanar Subhaay Baal Keli Bhoomi Bhaanu Laagi, Phalang Phalaang Huntein Ghaati Nabhtal Bho ।
Naai-Naai Maath Jori-Jori Haath Jodha Johain, Hanumaan Dekhe Jagjeevan Ko Phal Bho ।। 5 ।।

Go-Pad Payodhi Kari Holika Jyom Laai Lanka, Nipat Nisank Parpur Galbal Bho ।
Dron-So Pahaar Liyo Khyaal He Ukhaari Kar, Kanduk-Jyom Kapi Khel Bel Kaiso Phal Bho ।।
Sankat Samaaj Asmanjas Bho Ramraj, Kaaj Jug Pugani Ko Kartal Pal Bho ।
Saahasi Samatth Tulsii Ko Naah Jaaki Baah, Lokpaal Paalan Ko Phir Thir Thal Bho ।। 6 ।।

Kamath Ki Peethi Jaa Ke Godni Ki Gaadain, Maano, Naap Ke Bhaajan Bhari Jal Nidhi Jal Bho ।
Jaatudhaan-Daavan Paraavan Ko Durg Bhayo, Mahaamin Baas Timi Toman Ko Thal Bho ।।
Kumbhakarna-Raavan Payod-Naad-Indhan Ko, Tulsii Prataap Jaako Prabal Anal Bho ।
Bheesham Kahat Mere Anumaan Hanumaan, Saarikho Trikaal Na Trilok Mahaabal Bho ।। 7 ।।

Doot Ramraay Ko, Sapoot Poot Paunako, Tu Anjani Ko Nandan Prataap Bhuri Bhaanu So ।
Siya-Soch-Saman, Durit Dosh Daman, Saran Aaye Avan, Lakhan Priya Praan So ।।
Dasamukh Dusah Daridra Daribe Ko Bhayo, Prakat Tilok Ook Tulsii Nidhaan So ।
Gyaan Gunvaan Balvaan Seva Saavdhaan, Saheb Sujan Ur Aanu Hanuman So ।। 8 ।।

Davan-Duvan-Dal Bhuvan-Bidit Bal, Bed Jas Gaavat Bibudh Bandichor Ko ।
Paap-Taap-Timir Tuhin-Vighatan-Patu, Sevak-Saroruh Sukhad Bhaanu Bhor Ko ।।
Lok-Parlok Te Bisok Sapne Na Sok, Tulsii Ke Hiye Hai Bharoso Ek Aur Ko ।
Raam Ko Dulaaro Daas Baamdev Ko Nivaas, Naam Kali-Kaamtaru Kesari-Kisor Ko ।। 9 ।।

Mahaabal-Seem Mahaabheem Mahaabaan It, Mahaabeer Bidit Barayo Raghubir Ko ।
Kulis-Kathor Tanu Jorparai Ror Ran, Karuna-Kalit Man Dhaarmik Dheer Ko ।।
Durjan Ko Kaalso Karaal Paal Sajjan Ko, Sumire Harnahaar Tulsii Ki Peer Ko ।
Siya-Sukh-Daayak Dulaaro Raghunaayak Ko, Sevak Sahaayak Hai Saahasi Sameer Ko ।। 10 ।।

Rachibe Ko Bidhi Jaise, Paalibe Ko Hari, Har Miich Maaribe Ko, Jyaaibe Ko Sudhaapaan Bho ।
Dharibe Ko Dharani, Tarani Tam Dalibe Ko, Sokhibe Krsaanu, Poshibe Ko Him-Bhaanu Bho ।।
Khal-Duhkh Doshibe Ko, Jan-Paritoshibe Ko, Maangibo Malinta Ko Modak Sudaan Bho ।
Aarat Ki Aarati Nivaaribe Ko Tihun Pur, Tulsii Ko Saahib Hathilo Hanuman Bho ।। 11 ।।

Sevak Syokaai Jaani Janaki Maanai Kaani, Saanukul Soolapani Navai Naath Naak Ko ।
Devi Dev Daanav Dayaavne Hwai Joraim Haath, Baapure Baraak Kaha Aur Raja Raank Ko ।।
Jaagat Sovat Baithe Baagat Binod Mod, Taake Jo Anarth So Samarth Ek Aank Ko ।
Sab Din Ruro Parai Puro Jahan-Tahan Taahi, Jaake Hai Bharoso Hiye Hanuman Haank Ko ।। 12 ।।

Saanug Sagauri Saanukul Soolapani Taahi, Lokpaal Sakal Lakhan Raam Janaki ।
Lok Parlok Ko Bisok So Tilok Taahi, Tulsii Tamaai Kaha Kaahu Beer Aanaki ।।
Kesari Kisor Bandichor Ke Nivaaje Sab, Keerati Bimal Kapi Karunaanidhaan Ki ।
Baalak-Jyom Paalihain Kripalu Muni Siddh Taako, Jaake Hiye Hulsati Haank Hanuman Ki ।। 13 ।।

Karunaanidhaan, Balbuddhi Ke Nidhaan Mod-Mahima Nidhaan, Gun-Gyaan Ke Nidhaan Hau ।
Baamdev-Rup Bhup Raam Ke Snehii, Naam Let-Det Arth Dharm Kaam Nirbaan Hau ।।
Aapne Prabhaav Siita-Raam Ke Subhaav Seel, Lok-Bed-Bidhi Ke Biduush Hanuman Hau ।
Man Ki Bachan Ki Karam Ki Tihun Prakaar, Tulsii Tihaaro Tum Saahib Sujan Hau ।। 14 ।।

Man Ko Agam, Tan Sugam Kiye Kapiis, Kaaj Mahaaraaj Ke Samaaj Saaj Saaje Hain ।
Dev-Bandii Chor Ranror Kesari Kisor, Jug Jug Jag Tere Birad Biraaje Hain ।।
Beer Barjor, Ghati Jor Tulsii Ki Or, Suni Sakuchane Saadhu Khal Gan Gaaje Hain ।
Bigari Sanvaar Anjani Kumaar Kiji Mohin, Jaise Hot Aaye Hanuman Ke Nivaaje Hain ।। 15 ।।

Jaani Siromani Hau Hanumaan Sadaa Jan Ke Man Baas Tihaaro ।
Dhaaro Bigaaro Main Kaako Kaha Kehi Kaaran Kheezhat Haum To Tihaaro ।।
Saahib Sevak Naate To Haato Kiyo So Taahaan Tulsii Ko Na Charo ।
Dosh Sunaaye Te Aagehun Ko Hoshiyaar Hwain Hon Man Tau Hiye Haaro ।। 16 ।।

Te Re Thape Uthpai Na Mahesh, Thape Thirako Kapi Je Ghar Ghaale ।
Te Re Nivaaje Gareeb Nivaaj Biraajat Bairin Ke Ur Saale ।।
Sankat Soch Sabai Tulsii Liye Naam Phatai Makari Ke Se Jaale ।
Boodh Bhaye, Bali, Merihi Baar, Ki Haari Pare Bahutai Nat Paale ।। 17 ।।

Sindhu Tare, Bade Beer Dale Khal, Jaare Hain Lank Se Bank Mava Se ।
To Rani-Kehari Kehari Ke Bidale Ari-Kunjar Chhail Chhava Se ।।
Toson Samatth Sushaheb Sei Sahai Tulsii Dukh Dosh Dava Se ।
Baanar Baaj ! Badhe Khal-Khechar, Leejat Kyon Na Lapeti Lava-Se ।। 18 ।।

Achh-Vimardan Kaanan-Bhaani Dasanan Aanan Bhaa Na Nihaaro ।
Baridanaad Akampan Kumbhakarnn-Se Kunjar Kehari-Baro ।।
Raam-Prataap-Hutaasan, Kachchh, Bipachchh, Sameer Sameer-Dulaaro ।
Paap-Ten Saap-Ten Taap Tihoon-Ten Sadaa Tulsii Kahn So Rakhwaaro ।। 19 ।।

Jaanat Jahaan Hanumaan Ko Nivaajyau Jan, Man Anumaani Bali, Bol Na Bisaariye ।
Seva-Jog Tulsii Kabahum Kaha Chook Pari, Saahib Subhaav Kapi Saahibii Sambhaariye ।।
Aparaadhi Jaani Kijai Saasati Sahas Bhaanti, Modak Marai Jo Taahi Maahur Na Maariye ।
Saahasi Sameer Ke Dulaare Raghubiir Joo Ke, Baanh Peer Mahaabiir Begi Hi Nivaariye ।। 20 ।।

Baalak Biloki, Bali Baaretein Aapno Kiyo, Deenbandhu Dayaa Kiinhi Nirupaadhi Nyaariye ।
Raavaro Bharoso Tulsii Ke, Raavaroi Bal, Aas Raavariyai Daas Raavaro Bichaariye ।।
Bado Bikraal Kali, Kaako Na Bihaal Kiyo, Maathe Pagu Bali Ko, Nihaari So Nivaariye ।
Kesari Kisor, Ranror, Barjor Biir, Baanhupeer Raahumaatu Jyoun Pachaari Maariye ।। 21 ।।

Uthape Thapanthir Thape Uthapnahar, Kesari Kumaar Bal Aapno Sambhaariye ।
Raam Ke Gulaamni Ko Kaamtaru Raamdoot, Mose Deen Doobare Ko Takiya Tihaariye ।।
Saahib Samarth Toson Tulsii Ke Maathe Par, Soo Aparaadh Binu Biir, Baandhi Maariye ।
Pokhari Bisaal Baanh, Bali, Baarichar Peer, Makari Jyoun Pakari Kai Badan Bidaariye ।। 22 ।।

Raam Ko Sneha, Raam Saahas Lakhn Siiya, Raam Ki Bhakti, Soch Sankat Nivaariye ।
Mud-Markat Rog-Baariniidhi Heri Haare, Jeev-Jaamvant Ko Bharoso Tero Bhaariye ।।
Koodiye Kripaal Tulsii Suprem-Pabbayatein, Suthal Subel Bhaalu Baithi Kai Bichaariye ।
Mahaabiir Baankure Baraaki Baanh-Peer Kyon Na, Lankini Jyoun Laat-Ghaat Hi Marori Maariye ।। 23 ।।

Lok-Parlokahu Tilok Na Bilokiyat, Tose Samarth Chash Chaarihu Nihaariye ।
Karm, Kaal, Lokpaal, Ag-Jag Jeevajaal, Naath Haath Sab Nij Mahimaa Bichaariye ।।
Khaas Daas Raavaro, Nivaas Tero Taasu Ur, Tulsii So Dev Dukhii Dekhiyat Bhaariye ।
Baat Tarumool Baanhusool Kapikachhu-Beli, Upajii Sakeli Kapikeli Hi Ukhaariye ।। 24 ।।

Karam-Karal-Kans Bhuumipaal Ke Bharose, Bakii Bakbhagini Kaahu Te Kaha Daraigi ।
Badii Bikraal Baal Ghaatnii Na Jaat Kahi, Baanhoo-Bal Baalak Chhabile Chhote Charaigi ।।
Aai Hai Banaai Besha Aap Hi Bichaari Dekh, Paap Jaai Sabko Gunii Ke Paale Paraiyagi ।
Pootna Pisachinii Jyoun Kapikaanha Tulsii Ki, Baanhpeer Mahaabiir Tere Maare Marayagi ।। 25 ।।

Bhaalki Ki Kaalki Ki Rosh Ki Tridosha Ki Hai, Bedan Bisham Paap Taap Chhal Chaanh Ki ।
Karman Koot Ki Ki Jantra Mantra Boot Ki, Parahi Jaahi Paapinii Maliin Man Maanh Ki ।।
Paihahi Sajaaye, Nat Kahat Bajaaye Tohi, Baabari Na Hohi Baani Jaani Kapi Naanh Ki ।
Aan Hanumaan Ki Duhai Balwaan Ki, Sapat Mahabiir Ki Jo Rahai Peer Baanh Ki ।। 26 ।।

Sinhikaa Sahari Bal, Surasaa Sudhaari Chhal, Lankinii Pachaari Maari Baatikaa Ujaari Hai ।
Lank Parajaari Makari Bidaari Barbaar, Jaatudhaan Dhaari Dhooridhaanii Kari Daari Hai ।।
Tori Jamakaatar Mandodari Kadhori Aani, Raavan Ki Raanii Meghnaad Mahantaari Hai ।
Bheer Baanh Peer Ki Nipat Raakhi Mahaabiir, Kaun Ke Sakoch Tulsii Ke Soch Bhaari Hai ।। 27 ।।

Tero Baali Keli Biir Suni Sahamat Dhiir, Bhoolat Sareer Sudhi Sakrarabi Raahu Ki ।
Teri Baanh Basat Bisok Lokpaal Sab, Tero Naam Let Rahai Aarati Na Kaahu Ki ।।
Saam Daan Bhed Bidhi Bedahuu Labed Sidhi, Haath Kapinaath Hi Ke Choti Chor Saahu Ki ।
Aalas Anakh Parihaas Kai Sikhavan Hai, Ete Din Rahi Peer Tulsii Ke Baahu Ki ।। 28 ।।

Tookani Ko Ghar-Ghar Dolat Kangal Boli, Baal Jyon Kripal Natapal Paali Poso Hai।
Keeni Hai Sambhaar Saar Anjani Kumar Beer, Aapno Bisaari Hain Na Merehu Bharoso Hai।।
Itano Parekho Sab Bhaanti Samarath Aaju, Kapiraj Saanchi Kaho Ko Tilok Toso Hai।
Saasati Sahat Daas Kije Pekhi Parihaas, Cheeri Ko Marn Khel Baalkani Ko So Hai।। 29 ।।

Aapne hi paap te tripaat te ki saap te, badhi hai baah bedan kahi na sahi jaati hai ।
Aushadh anek jantar mantra totkaadi kiye, baadi bhaye devta manaaye adhikaati hai ।।
Kartaar, bharataar, harataar, karm kaal, ko hai jagjaal jo na maanat itaati hai ।
Chero tero tulsi tu mero kahyo Raam doot, dheer teri beer mohi peer te pirati hai ।। 30 ।।

Doot Raam raay ko, sapoot poot baay ko, samatv haath paay ko sahaay asahaay ko ।
Baaki biradaavali vidit ved gaaiyat, Raavan so bhat bhayo muthika ke ghaay ko ।।
Ete bade saahib samarth ko nivaajo aaj, seedata susevak bachan man kaay ko ।
Thori baah peer ki badi galaani Tulsi ko, kaun paap kop, lop prakat prabhaay ko ।। 31 ।।

Devi dev danuj manuj muni siddh naag, chhote bade jeev jete chetan achet hai ।
Pootana pisaachi jaatudhaani jaatudhaan baam, Raam doot ki rajaai maathe maani let hai ।।
Ghor jantar mantra koot kapat kurog jog, Hanuman aan suni chhaadat niket hai ।
Krodh kije karm ko prabodh kije Tulsi ko, sodh kije tinako jo dosh dukh det hai ।। 32 ।।

Tere bal baanar jitaye ran Raavan so, tere ghaale jaatudhaan bhaye ghar-ghar ke ।
Tere bal Raamraaj kiye sab surakaaj, sakal samaaj saaj saaje Raghubar ke ।।
Tero gunagaan suni geerbaan pulakat, sajal bilochan biranchi hari har ke ।
Tulsi ke maathe par haath fero kisnaath, dekhiye na daas dukhi toso kanigar ke ।। 33 ।।

Paalo tere took ko parehu chook mookiye na, koor kaudi dooko haun aapani or heriye ।
Bhoraanath bhore hi sarosh hot thore dosh, poshi toshi thaapi aapani na avaderiye ।।
Ambu tu haun ambuchar, ambu tu haun dimbh so na, boojhiye bilamb avalamb mere teriye ।
Balak bikal jaani paahi prem pehchaani, Tulsi ki baah par laami loom feriye ।। 34 ।।

Gheri liyo rogan, kujogan, kulogan jyau, baasar jalad ghan ghata dhuki dhaai hai ।
Barsat baari peer jaariye javaase jas, rosh binu dosh dhoom-mool malinaai hai ।।
Karunaanidhaan Hanuman maha balwaan, heri hansi haanki phoonki faujai te udaai hai ।
Khaaye huto Tulsi kurog raadh raakasan, Keshari kisor raakhe beer bariaai hai ।। 35 ।।

Raam gulaam tu hi Hanuman gosaai susaai sada anukoolo ।
Paalyo haun baal jyoun aakhar doo pitu maatu son mangal mod samoolo ।।
Baah ki bedan baah pagaar pukaarat aarat aanand bhoolo ।
Shri Raghubir nivaariye peer rahau darbaar paro lati loolo ।। 36 ।।

Kaala ki karaaltaa karam kathinaai ki dhaun, paap ke prabhaav ki subhaay baay baavare ।
Bedan kubhaanti so sahi na jaati raati din, soi baah gahi jo gahi sameer daabare ।।
Laayo taru Tulsi tihaaro so nihaari baari, seenchiye maleen bho tyo hai tihu taavare ।
Bhootani ki aapani paraaye ki kripa nidhaan, jaaniyata sabhi ki reeti Raam raavare ।। 37 ।।

Paanay peer pet peer baah peer munh peer, jarjar sakal peer mai hai ।
Dev bhoot pitar karam khal kaal grah, mohi par davar damaanak si dai hai ।।
Haun to binu mol ke bikaano bali baarehi te, oat Raam naam ki lalaat likhi lai hai ।
Kumbhaj ke kinkar bikal boodhe gokhuran, haay Raam raay aisi haal kahu bhai hai ।। 38 ।।

Bahuk-Subahu Niche Leecher-Marich Mili, Munhpir Ketuja Kurog Jatudhan Hain ।
Ram Naam Jagjaap Kiyo Chaho Sanurag, Kaal Kaise Doot Bhoot Kaha Mere Maan Hain ।।
Sumire Sahaay Ram Lakhn Aakhar Dou, Jinkay Samooh Saake Jagat Jahaan Hain।
Tulsi Sambhari Tadka Sanhari Bhari Bhat, Bedhe Bargad Se Banai Banvaan Hain ।। 39 ।।

Baalpana Sudhe Man Ram Sanmukh Bhayo, Ram Naam Let Maang Khaat Tooktaak Haun।
Payo Lok-Reeti Mein Punit Preeti Ram Rai, Moh Bas Baitho Tori Tarki Taraak Haun।।
Khote-Khote Aacharan Aacharat Apnaayo, Anjani Kumar Sodhyo Rampani Paak Haun।
Tulsi Gusaai Bhayo Bhonde Din Bhool Gayo, Taako Phal Paavat Nidaan Paripak Haun।। 40 ।।

Asan-Basan-Hin Bisham-Bishaad-Leen, Dekhi Deen Doobro Karai Na Haay Haay Ko।
Tulsi Anaath So Sanaath Raghunath Kiyo, Diyo Phal Seel Sindhu Aapne Subhaay Ko।।
Neec Yahin Beech Pati Paai Bharu Haigo, Bihaayi Prabhu Bhajan Bachan Man Kaay Ko।
Taa Te Tanu Peshiyat Ghor Bartor Mis, Phooti Phooti Niksat Lon Ram Rai Ko।। 41 ।।

Jion Jag Janaki Jeevan Ko Kahai Jan, Maribe Ko Baranasi Bari Surasari Ko।
Tulsi Ke Duhun Haath Modak Hain Aise Thaau, Jaa Ke Jiye Muye Soch Karihai Na Lari Ko।।
Moko Jhuto Saancho Log Ram Ko Kaht Sab, Mere Mann Maan Hai Na Har Ko Na Hari Ko।
Bhaari Peer Dusah Sareer Te Bihal Hot, Sooo Raghubeer Bin Sakai Door Kari Ko।। 42 ।।

Seetapati Saahab Sahaay Hanumaan Nit, Hit Upadesh Ko Mahesh Maano Guru Kai।
Maanas Bachan Kaay Sarn Tihaare Paay, Tumhare Bharose Sur Main Na Jaane Sur Kai।।
Byadhi Bhoot Janit Upadhi Kaahu Khal Ki, Samaadhi Kije Tulsi Ko Jaani Jan Phur Kai।
Kapinaath Raghunaath Bholanaath Bhootnaath, Rog Sindhu Kyon Na Daariyat Gaay Khur Kai।। 43 ।।

Kahon Hanumaan Son Sujan Ram Rai Son, Kripa Nidhaan Sankar Son Saavadhaan Suniye।
Harsha Vishaad Raag Rosh Gun Dosh Mai, Birachi Biranchi Sab Dekhiyat Duniye।।
Maaya Jeev Kaal Ke Karam Ke Subhaay Ke, Karaiya Ram Bed Kahain Saanchi Man Guniye।
Tumh Te Kaha Na Hoy Ha Ha So Bujhaiye Mohi, Haun Huun Rahon Maunahi Bayo So Jaani Luniye।। 44 ।।

Hanuman Bahuk Benefits:

  1. When you practice the Hanuman Bahuk path, you will feel relief from body pain, and any tasks that are stuck in your life will progress or yield results.
  2. You get Protection against evil influences, by chanting Hanuman Bahuk Path for 21 Days. Reciting the Hanuman Bahuk prevents negative energies from lingering nearby. This recitation acts as a shield for the individual, much like a protective cover.

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